रहगुज़र जिंदगी का
इतने ख़फ़ा क्यूँ हो जिंदगी से
ये कौन सी दोबारा आने वाली है।अजनबी क्यूँ बनते हो जिंदगी से
वाकेफ रहो, साथ जाने वाली है।
अगर समझना है इस जिंदगी को
तो ये हक़ीक़त समझाने वाली है।
खामोशी से क्यूँ देख रहे हों जिंदगी को
वक़्त की शिकायतें शोर करने वाली है।
मुश्किल तो होगा रहगुज़र जिंदगी का
आसान कहां ख्वाहिशें होने वाली है।
- दिशिता भट्ट
🙏🙏
ReplyDeleteVery good
ReplyDeleteक्या बात है!! 👏🏻👏🏻 Your perspective on life makes me want to live more thoughtfully.
ReplyDeleteLast Lines... touch my ❤️😇
जीवनकी वास्तविकता को अति सुंदर भावपूर्ण तरीके से पेश करने के लिए कवयित्री को धन्यवाद और आशीर्वाद- ऐसे अर्थपूर्ण काव्य देते रहिए यही अपेक्षा।
ReplyDeleteयही शैली के साथ सब विषय को अपनी नज़र से दिखाते रहिये...!
ReplyDeleteशुभकामनाएं💐