मुबारकां...
मुबारकां... हाथों में कलम और होंठों पे हँसी रखते हुए, आज एक साल पूरा हुआ उम्र के पन्नो में से। साँसों में विश्वास और धड़कन मे हौसला रखे, आज एक साल खत्म हुआ कुछ इम्तिहान में। ह्रदय में आस्था और अनुभव मे सीख रखके, आज एक साल कट गया विश्वास रखते हुए। विचारों में शुद्धता और दिल मे दर्द छुपाते हुए, आज एक साल गुज़र गया हमारा उम्मीदों में। अंधेरो में खामोशी और दिन मे ख्वाब सजाते, आज यूँ ही मेरे कुछ हसीन साल हो गये पूरे। शब्दों में सच्चाई और अर्थ मे दास्तान लिखते, आज कहेना है मुबारकां ये जींदगानी के लिए। - दिशिता भट्ट